अगर किसी दिन घर लौटकर न आऊँ

 अगर किसी दिन घर लौटकर न आऊँ,

तो समझ लेना कि मैं हार गया हूँ।

जो जंग थी अंदर ही अंदर चल रही,

शायद अब मैं खुद से ही हार गया हूँ।


चेहरे की हँसी बस एक मुखौटा थी,

दिल में तो सन्नाटा हर बार गया हूँ।

अगर लौट न सकूँ उस पुराने किनारे पे,

तो समझ लेना बहुत दूर पार गया हूँ।

                           - Sanoj Das


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