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मैं रुकूंगा नहीं
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लूंगा जब तलक साँस चले, हर दर्द में इक राग पले। रास्ता टेढ़ा, धूप कड़ी, पर छाँव नहीं मैं माँगूंगा— मैं रुकूंगा नहीं। हर मोड़ पर काँटे होंगे, हर शब्द में ताने होंगे, लोग हँसेंगे, रोकेंगे, पर चुप मैं फिर भी ना रहूंगा— मैं झुकूंगा नहीं। गिरा तो फिर उठ जाऊंगा, अधूरे ख़्वाब सजाऊंगा। जो कहें "तू कुछ कर न सका", उन सबको सच मैं दिखलाऊंगा— मैं थकूंगा नहीं। कभी कदम डगमगाएंगे, पर पथ से ना हट पाएंगे। जो बात दिल से ठान लिया, वो पूरा करके जाऊंगा— मैं रुकूंगा नहीं। — Sanoj Das
मैं हार नहीं मानूंगा
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थक जाऊँ तो भी चलूंगा, अंधेरों में दीप जलूंगा। हर चोट मुझे सँवारती है, हर हार मुझे निखारती है। राहें चाहे कठिन बनें, मंज़िलें भले अजनबी हों, हौसलों की चिंगारी से राख से भी ज़िंदगानी हों। हर मोड़ पर एक जंग है, हर साँस में तूफ़ान है, लेकिन दिल में जो जल रहा, वो सपना मेरा अभिमान है। तूफ़ान मुझे बहा न पाए, बिजली मुझे जला न पाए, मैं वो दीया हूँ जो आँधियों में भी खुद को बुझा न पाए। ना वक़्त से डरूंगा, ना हालात से झुकूंगा, टूट जाऊँ भले ज़मीन पर, पर हार कभी न मानूंगा। — Sanoj Das