मैं हार नहीं मानूंगा

 थक जाऊँ तो भी चलूंगा,

अंधेरों में दीप जलूंगा।

हर चोट मुझे सँवारती है,

हर हार मुझे निखारती है।


राहें चाहे कठिन बनें,

मंज़िलें भले अजनबी हों,

हौसलों की चिंगारी से

राख से भी ज़िंदगानी हों।


हर मोड़ पर एक जंग है,

हर साँस में तूफ़ान है,

लेकिन दिल में जो जल रहा,

वो सपना मेरा अभिमान है।


तूफ़ान मुझे बहा न पाए,

बिजली मुझे जला न पाए,

मैं वो दीया हूँ जो आँधियों में

भी खुद को बुझा न पाए।


ना वक़्त से डरूंगा,

ना हालात से झुकूंगा,

टूट जाऊँ भले ज़मीन पर,

पर हार कभी न मानूंगा।


            — Sanoj Das

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